किसान भाई शिमला मिर्च की खेती करके लाखों कमा सकते हैं। शिमला मिर्च की खेती एक ऐसा व्यवसाय है जिसमें आप मात्र दो से चार महीने में अच्छा लाभ कमा सकते हैं।
अगर सही तरीके से उन्नत खेती की जाए, तो किसानों को करीब-करीब 8 से 10 क्विंटल प्रति एकड़ फसल की प्राप्ति हो सकती है। इसकी खेती हरियाणा, पंजाब, झारखंड, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में बहुत सफल मानी जाती है।
1. भूमि का चयन (Soil Selection)
शिमला मिर्च की बंपर पैदावार के लिए उचित भूमि का चयन बहुत जरूरी है:
- मिट्टी: चिकनी दोमट मिट्टी (जिसमें जल निकास अच्छा हो) सबसे अच्छी मानी जाती है। इसके अलावा बलुई दोमट मिट्टी में भी खेती की जा सकती है।
- pH मान: मिट्टी का पी.एच. मान 6 से 6.5 के बीच होना चाहिए।
2. जलवायु (Climate)
शिमला मिर्च के लिए नर्म और आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है।
- तापमान: अच्छी वृद्धि के लिए 21 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे अच्छा रहता है।
- सावधानी: ज्यादा पाला (Frost) गिरने से फसल खराब हो सकती है। ठंड में फल छोटे और टेढ़े-मेढ़े हो सकते हैं।
3. उन्नत किस्में (Top Varieties)
अच्छे उत्पादन के लिए हमेशा उन्नत किस्मों का ही चयन करें:
- अर्का गौरव, अर्का मोहिनी
- कैलिफोर्निया वंडर, योलो वंडर
- ऐश्वर्या, अलंकार, हरी रानी
- पूसा दीप्ति, ग्रीन गोल्ड आदि।
4. खाद और उर्वरक (Fertilizers)
खेत की तैयारी करते समय 3 टन सड़ी हुई गोबर की खाद मिट्टी में मिला दें। इसके अलावा रासायनिक खाद की मात्रा प्रति एकड़ इस प्रकार रखें:
- नत्रजन (Nitrogen): 60 किलोग्राम (इसे दो बार में दें - आधा रोपाई के समय और आधा 55 दिन बाद)।
- फास्फोरस: 80 किलोग्राम।
- पोटाश: 60 किलोग्राम।
5. बुवाई और रोपाई का समय (Sowing & Planting)
बीज उपचार: बुवाई से पहले बीजों को 2.5 ग्राम थाइरम या बाविस्टिन से उपचारित जरूर करें।
बुवाई का समय:
- पहली बार: जून से जुलाई
- दूसरी बार: अगस्त से सितम्बर
- तीसरी बार: नवम्बर से दिसम्बर
रोपाई (Transplanting): जब पौधा 15 सेमी लंबा हो जाए (3-4 पत्तियां आ जाएं), तब उसे खेत में लगाएं। लाइन से लाइन की दूरी 60 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 45 सेमी रखें।
6. सिंचाई और देखभाल (Irrigation & Care)
शिमला मिर्च को नपे-तुले पानी की जरूरत होती है।
- गर्मी में: हर 1 सप्ताह (7 दिन) में सिंचाई करें।
- सर्दी में: 10 से 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें।
- निराई-गुड़ाई: रोपाई के 25 दिन बाद पहली और 45 दिन बाद दूसरी निराई करें। 30 दिन बाद पौधों पर मिट्टी चढ़ा दें ताकि वे गिरें नहीं।
7. रोग और कीट नियंत्रण (Disease & Pest Control)
शिमला मिर्च में कई तरह के रोग लगते हैं, जिनका समय पर इलाज जरूरी है:
कीट (Insects): माहूँ, थ्रिप्स, सफेद मक्खी।
उपचार: 1 लीटर पानी में डायमेथोएट या मेलाथियान का घोल बनाकर 15 दिन के अंतर पर छिड़कें।
प्रमुख रोग:
- आर्द्रगलन: यह नर्सरी में लगता है। बीज उपचारित करके ही बोएं।
- भभूतिया रोग (Powdery Mildew): पत्तियों पर सफेद पाउडर जम जाता है। इसके लिए 0.2% सल्फर घोल का छिड़काव करें।
- पर्ण कुंचन (Leaf Curl): पत्ते सिकुड़ जाते हैं। रोकथाम के लिए डाइमिथोएट (1 मिली/लीटर) का छिड़काव करें।
8. तुड़ाई और मुनाफा (Harvesting & Profit)
रोपाई के 60 से 70 दिनों बाद फल तोड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं। तुड़ाई लगभग 3-4 महीने तक चलती है।
कमाई:
बाजार में शिमला मिर्च का भाव आमतौर पर 40 से 80 रुपये किलो तक रहता है। अगर आप एक एकड़ में उन्नत खेती करते हैं, तो साल भर में आसानी से 3 से 4 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं।
निष्कर्ष
किसान भाइयों, शिमला मिर्च कम जगह और कम समय में अमीर बनने का एक बेहतरीन जरिया है। सही तकनीक अपनाएं और "खेती और किसान" के साथ जुड़े रहें।




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